
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल इस समय अपनी ज़िंदगी के सबसे भावनात्मक और कठिन दौर से गुजर रहे हैं। उनके बेटे अग्निवेश अग्रवाल के अचानक निधन की खबर ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे कॉरपोरेट जगत को झकझोर कर रख दिया है। बिज़नेस की ऊंचाइयों को छूने वाले इस उद्योगपति के लिए यह क्षण बेहद निजी और पीड़ादायक है।
दुख के बीच दोहराया गया बड़ा फैसला
इस गहरे शोक के बीच अनिल अग्रवाल ने एक ऐसा फैसला दोहराया है, जिसकी चर्चा पहले भी हो चुकी थी, लेकिन अब इसके मायने और गहरे हो गए हैं। उन्होंने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि जीवन में धन से ज्यादा उद्देश्य और आध्यात्मिक संतुलन जरूरी है। यह वही सोच है जिसे वे पहले भी सार्वजनिक मंचों पर साझा कर चुके हैं।
Business Titan, But a Grieving Father
कॉरपोरेट दुनिया में सख्त फैसलों के लिए पहचाने जाने वाले अनिल अग्रवाल इस वक्त एक बिज़नेस टाइकून नहीं, बल्कि एक शोकाकुल पिता हैं। करीबियों का कहना है कि बेटे की मौत ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया है। यही वजह है कि वे अब जीवन के मूल्यों, समाज सेवा और आत्मिक शांति पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।
Corporate India में भावनात्मक हलचल
अनिल अग्रवाल के इस फैसले के बाद Corporate India में भी एक संदेश गया है—कि अरबों की संपत्ति और साम्राज्य भी इंसानी दुख के सामने बौने पड़ जाते हैं। सोशल मीडिया पर कई उद्योगपति और आम लोग उन्हें संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं।
जिस दुनिया में शेयर प्राइस गिरने-बढ़ने पर हलचल मच जाती है, वहां एक पिता का जीवनभर का सुकून खो जाना शायद सबसे बड़ा “loss” है—जिसका कोई balance sheet नहीं होता।
एक पिता की चिट्ठी बेटे के लिए
आज मेरे जीवन का सबसे दर्दनाक दिन है।
मेरा अग्निवेश, मेरा 49 साल का बेटा, आज हमारे बीच नहीं रहा। एक बाप के कंधे पर बेटे की अर्थी जाये इससे बुरा और क्या हो सकता है। अग्निवेश अपने दोस्त के साथ अमेरिका में skiing करने गया था। वहां accident हो गया। वो Mount Sinai Hospital, New York में ठीक हो रहा था। हमें लगा सब ठीक हो जाएगा… लेकिन अचानक cardiac arrest हो गया। और हमारा बच्चा हमें छोड़कर चला गया।
3 जून 1976 को पटना में जब अग्नि हमारी दुनिया में आया, वो पल आज भी आंखों के सामने है। एक middle class Bihari परिवार में जन्मा था अग्नि।
तुम्हारे साथ बिताया गया हर एक पल आज बहुत याद आ रहा है बेटा।
अपनी माँ का दुलारा अग्नि बचपन में बेहद चंचल और शरारती था। हमेशा हँसता, हमेशा मुस्कुराता| यारों का यार था वो, और अपनी बहन Priya को लेकर सबसे प्रोटेक्टिव भी।
उसने Mayo College, Ajmer में पढ़ाई की। बेहद strong personality थी अग्नि की – boxing champion, horse riding का शौकीन, और कमाल का musician। उसने Fujairah Gold जैसी शानदार कंपनी खड़ी की, और Hindustan Zinc का Chairman भी बना।

लेकिन इन सबसे ऊपर अग्नि बेहद simple था। हमेशा अपने friends और colleagues के बीच में ही रहता था। जिससे भी मिलता, उसे अपना बना लेता था। वो हमेशा ज़मीन से जुड़ा रहा सीधा, सच्चा, जिंदादिली और इंसानियत से भरा।
वो सिर्फ बेटा नहीं था – वो मेरा दोस्त था, मेरी शान था, मेरी पूरी दुनिया था।
मैं और किरन टूट से गए हैं। बस यही सोच रहे हैं कि हमारा बेटा तो चला गया। लेकिन जो लोग हमारे वेदांता में काम करते हैं, वो सब अग्निवेश ही तो हैं। वो सब हमारे बेटे-बेटियां हैं।
अग्नि और मेरा सपना था, हिंदुस्तान को आत्मनिर्भर बनाना। वो हमेशा कहता था – “पापा, हमारे देश में क्या नहीं है? फिर हम किसी से पीछे क्यों रहें?”
हमारी दिली इच्छा यही रही कि देश का कोई बच्चा भूखा न सोए, कोई बच्चा अनपढ़ न रहे, हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो, और सभी युवाओं को रोज़गार मिले।
मैंने अग्निवेश से वादा किया था हमारे पास जितना भी धन आएगा, उसका 75% से ज्यादा समाज के काम में लगायेंगे। आज फिर वो वादा दोहराता हूँ। अब और भी सादगी से जीवन जीऊंगा। और अपनी बाकी जिंदगी इसी में लगा दूंगा।
हम उन सभी मित्रों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों का दिल से धन्यवाद करते हैं जो हमेशा अग्निवेश के साथ रहे।
अभी तो साथ मिलकर बहुत कुछ करना था अग्नि। तुम्हें पूरी जिंदगी जीनी थी। कितने सपने थे, कितने अरमान थे, सब कुछ अधूरा ही रह गया। समझ नहीं आता, तुम्हारे बिना अब ज़िन्दगी कैसे कटेगी बेटा।
तुम्हारे बिना ज़िंदगी हमेशा अधूरी रहेगी, लेकिन तुम्हारे सपने अधूरे नहीं रहने दूंगा।
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